गुजरात के भरूच जिले से एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है, जिसने पुलिस से लेकर आम लोगों तक को हैरान कर दिया। 29 मार्च 2025 को भरूच के भोलाव इलाके में एक गंदे नाले के पास आवारा कुत्तों द्वारा नोचे जा रहे एक संदिग्ध पैकेट से मिली एक कटी हुई मानव खोपड़ी ने इस भयानक हत्याकांड की शुरुआत की। यह मामला न सिर्फ दिल दहला देने वाला था, बल्कि इसकी परतें खुलते ही जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
कटे हुए सिर से शुरू हुई कहानी
उस दिन स्थानीय लोगों ने जब सीवर के पास कुत्तों को एक काले पॉलीथिन पैकेट को खींचते देखा, तो पहले उन्हें लगा कि कोई मरा हुआ जानवर होगा। लेकिन जब उन्होंने पास जाकर देखा तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उस पैकेट में एक इंसानी सिर था। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब जांच शुरू की, तो यह साफ हो गया कि यह कोई मामूली मामला नहीं, बल्कि एक भीषण हत्या है। इसके बाद चार दिनों तक पुलिस को इसी इलाके से मानव शरीर के अन्य टुकड़े – हाथ, पैर, धड़ – मिले। शव को इस तरह नौ टुकड़ों में काटा गया था जैसे कोई कसाई जानवर की बोटी कर रहा हो।
पहला सुराग: हाथ पर बना टैटू
पुलिस ने जब शव के टुकड़ों की जांच शुरू की, तो उन्हें एक कटा हुआ हाथ मिला, जिस पर ‘सचिन’ नाम का टैटू था। यह एक अहम सुराग था। इसके बाद पुलिस ने पूरे भरूच के 31 थानों से गुमशुदगी की रिपोर्ट मंगवाई और 35-40 वर्ष की उम्र वाले पुरुषों की सूची बनाकर जांच शुरू की। इसी दौरान उन्हें पता चला कि भरूच के सी डिवीजन थाने में एक दिन पहले ही सचिन नाम के युवक की गुमशुदगी दर्ज करवाई गई थी। पुलिस ने तुरंत गुमशुदगी दर्ज कराने वाले व्यक्ति को बुलाया और शव की शिनाख्त करवाई। यह व्यक्ति था शैलेन्द्र, मृतक का भाई।
मृतक की पहचान: बिजनौर का रहने वाला था सचिन
शिनाख्त से पता चला कि मृतक सचिन चौहान उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला था और पिछले कई वर्षों से भरूच की एक फैक्ट्री में काम करता था। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उसके भाई ने दर्ज करवाई थी। इसके बाद पुलिस ने सचिन के दोस्त और रिश्तेदारों से पूछताछ शुरू की। यही से इस केस में आया एक नया मोड़। पुलिस को पता चला कि सचिन का सबसे करीबी दोस्त शैलेन्द्र, जो उसी फैक्ट्री में काम करता था, अचानक शहर से गायब हो गया है और उसका मोबाइल फोन भी बंद है। आखिरी बार सचिन को इसी शैलेन्द्र के साथ देखा गया था।
गायब दोस्त बना पहला संदिग्ध
शैलेन्द्र के गायब होते ही पुलिस का शक उसी पर गया। जांच में यह भी पता चला कि हत्या से पहले सचिन का मोबाइल कॉल बंद था, लेकिन वह मैसेज के जरिए बात कर रहा था। यह व्यवहार काफी संदिग्ध था क्योंकि ऐसा अक्सर अपराधी करते हैं ताकि लगे कि व्यक्ति जिंदा है। पुलिस ने तुरंत यूपी के बिजनौर में शैलेन्द्र की तलाश शुरू की और कुछ ही दिनों में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में पहले तो वह बात घुमाता रहा, लेकिन जब सख्ती की गई तो उसने सचिन की हत्या की बात स्वीकार कर ली।
ब्लैकमेलिंग बना हत्या की वजह
पुलिस पूछताछ में शैलेन्द्र ने जो राज खोले, उसने सभी को चौंका दिया। उसने बताया कि सचिन उसका करीबी दोस्त था, लेकिन उसने एक बड़ी गलती कर दी। एक दिन सचिन ने गलती से शैलेन्द्र के फोन से उसकी पत्नी की कुछ निजी तस्वीरें अपने फोन में भेज लीं। इसके बाद वह शैलेन्द्र को इन तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल करने लगा। शैलेन्द्र ने बताया कि 24 मार्च की रात उसने अपने घर पर पार्टी रखी थी और उसी रात सचिन को बुलाया था। शराब और खाना खाने के बाद जब सचिन सो गया, तो शैलेन्द्र ने उसका फोन उठाकर अपनी तस्वीरें डिलीट करने की कोशिश की। लेकिन इसी दौरान सचिन की नींद खुल गई और दोनों में झगड़ा हो गया।
रसोई के चाकू से की गई हत्या
झगड़ा बढ़ने पर शैलेन्द्र ने रसोई से चाकू उठाया और सचिन पर वार कर दिया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद उसने सचिन के शव के टुकड़े किए और अगले दिन से धीरे-धीरे उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। हत्या के अगले दिन भी वह काम पर गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। शाम को उसने पॉलीथीन और चाकू लाकर लाश के टुकड़े किए और फिर रात को एक-एक करके अलग-अलग नालों में फेंकता गया।
सीसीटीवी से बचने के लिए पहना महिलाओं का नाइट गाउन
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि शैलेन्द्र ने शव को ठिकाने लगाते समय महिलाओं के नाइट गाउन का सहारा लिया। ताकि अगर सीसीटीवी कैमरे में उसकी तस्वीर आ भी जाए, तो कोई उसे पहचान न सके। कुछ दिनों बाद वह बिजनौर चला गया और वहीं से सचिन के मोबाइल से उसके रिश्तेदारों को मैसेज करता रहा ताकि लगे कि वह जिंदा है। लेकिन जैसे ही उसने फोन बंद किया, पुलिस को शक हो गया और उन्होंने बिजनौर में उसकी तलाश शुरू कर दी।
ATM से पैसे निकालकर भी किया पुलिस को भ्रमित करने का प्रयास
इतना ही नहीं, शैलेन्द्र ने सचिन का एटीएम कार्ड और पिन भी ले लिया था। ट्रेन में यात्रा करते समय उसने वह कार्ड वहीं छोड़ दिया ताकि यदि कोई और उसे इस्तेमाल करे, तो पुलिस गुमराह हो जाए। लेकिन उसकी ये सभी साजिशें अंततः नाकाम रहीं।
निष्कर्ष: दोस्ती की आड़ में छिपा खतरनाक दुश्मन
यह पूरा मामला एक चेतावनी है कि किस प्रकार दोस्ती की आड़ में अपराध पनप सकता है। यह हत्या केवल ब्लैकमेलिंग की वजह से हुई, लेकिन इसे अंजाम देने का तरीका, लाश को नौ टुकड़ों में काटना, शव के अंगों को छुपाने के लिए महिला के कपड़े पहनना – यह सब इस मामले को बेहद खौफनाक बना देता है।पुलिस की मुस्तैदी और सूझबूझ से यह केस सुलझ पाया, वरना ऐसा भी हो सकता था कि सचिन की लाश कभी नहीं मिलती और एक परिवार हमेशा के लिए अपने बेटे की तलाश में भटकता रहता।